संक्षारण किसे कहते हैं? कारण सहित स्पष्ट कीजिए कि यह किस प्रकार का परिवर्तन है?
संक्षारण किसे कहते हैं? कारण सहित स्पष्ट कीजिए कि यह किस प्रकार का परिवर्तन है?
उत्तर- आपने अवश्य देखा होगा कि लोहे की बनी नयी वस्तुएँ चमकीली होती हैं लेकिन कुछ समय पश्चात उन पर लालिमा युक्त भूरे रंग की परत चढ़ जाती है। प्रायः इस प्रक्रिया को लोहे पर जंग लगना कहते हैं।

"जब कोई धातु अपने आसपास अम्ल, आर्द्रता आदि के संपर्क में आती है तब ये संक्षारित होती हैं और इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं।"
कुछ अन्य धातुओं में भी ऐसा ही परिवर्तन होता है
चांदी के ऊपर काली परत व तांबे के ऊपर हरि परत चढ़ना संक्षारण के अन्य उदाहरण हैं।

![]() |
संक्षारण के कारण कार के ढाँचे, पुल, लोहे की रेलिंग, जहाज तथा धातु, विशेषकर लोहे से बनी वस्तुओं की बहुत क्षति होती है। लोहे का संक्षारण एक गंभीर समस्या है क्षतिग्रस्त लोहे को बदलने में हर वर्ष अधिक पैसा खर्च होता है।
जंग लगना अथवा संक्षारण एक रासायनिक प्रक्रिया है ।
प्रश्न - संक्षारण से सुरक्षा कैसे करें?
उत्तर - पेंट करके, तेल लगाकर, ग्रीज़ लगाकर, यशदलेपन (लोहे की वस्तुओं पर जस्ते की परत चढ़ाकर) क्रोमियम लेपन, एनोडिकरण या मिश्र धातु बना कर लोहे को जंग लगने से बचाया जा सकता है। इस प्रकार हम धातुओं पर लगने वाली जंग और उसके बचाव की जानकारी हुई ।

*अतिरिक्त प्रश्न*
प्रश्न - यशदलेपन क्या है अथवा यशदलेपन किसे कहते हैं?
उत्तर - लोहे एवं इस्पात को जंग से सुरक्षित रखने के लिए उनपर जस्ते (जिंक) की पतली परत चढ़ाने की विधि को "यशदलेपन" कहते हैं। जस्ते की परत नष्ट हो जाने के बाद भी यह यशदलेपित वस्तु जंग से सुरक्षित रहती है।


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें