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सापेक्ष त्रुटि / आपेक्षिक त्रुटि अथवा भिन्नात्मक़ त्रुटि

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सापेक्ष अथवा भिन्नात्मक त्रुटि   किसी भौतिक राशि का प्रेषित मान, x ± Δx =  x{1 ± Δx/x}  माना   Δx/x=p तब प्रेषित मान  = x (1±p)                =  x ± xp अतः किसी राशि की माप को    x (1±p)    के रूप में लिखने पर,  '  x  ' उस राशि की  प्रेक्षित माप  तथा  '  p  ' उस माप में  सापेक्ष त्रुटि  होती है।  प्रेक्षित माप  x   को  (x ± Δx)  के रूप में प्रदर्शित करने का तात्पर्य है कि माप का मान  (x - ∆x)  से  (x + Δx)  के बीच कुछ भी हो सकता है, जहाँ  Δx  इस माप में  अधिकतम संभव निरपेक्ष त्रुटि  है। माना यदि किसी राशि की माप x = 4.236 सेमी हो, तो इस माप में  दाहिनी ओर का अन्तिम अंक अनिश्चित होता है। यहाँ अंक 6 अनिश्चित है। यदि प्रयोग किये गये यंत्र का अल्पतमांक  ज्ञात नहीं है तो इस माप में  निरपेक्ष  त्रुटि  Δx  ज्ञात करने लिए,...

अनुमेय त्रुटि क्या है? इसकी परिभाषा व सूत्र

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अनुमेय त्रुटि की परिभाषा अनुमेय त्रुटि किसे कहते हैं? अनुमेय त्रुटि की परिभाषा प्रत्येक प्रयोग में  प्रयुक्त किये गये  मापक यंत्रों के अल्पतमांकों के  निश्चित मानों के कारण  उन यंत्रों द्वारा ली गयी मापों में  आयी सापेक्ष त्रुटियों के कारण,  गणना करने पर प्रयोग के फल में  जो सापेक्ष त्रुटि आ जाती है,  उसे अनुमेय त्रुटि कहते हैं।   अन्य त्रुटियों के समान, इसका भी अधिकतम मान ही ज्ञात किया जाता है। यदि किसी प्रयोग में, Y = AˣBʸ/Cᶻ तो Y में अनुमेय त्रुटि ΔY/Y = {xΔA/A + yΔB/B - zΔC/C} (यह समीकरण कैसे आया? जानने के लिए सबसे नीचे देखिए...)   तथा Y  में अधिकतम अनुमेय त्रुटि , ΔY/Y = { xΔA/A + yΔB/B + zΔC/C } (यहां केवल माइनस की जगह प्लस (+) लगा देते हैं)   Y में अधिकतम अनुमेय त्रुटि, प्रतिशत में =     ΔY/Y × 100% =  { xΔA/A + yΔB/B + zΔC/C } × 100% विशेष - यदि   Y = AˣBʸ/Cᶻ Y = AˣBʸC⁻ᶻ दोनों ओर का log लेने पर , logy = xlogA + ylogB - zlogC इस समीकरण का आंशिक अ...

निरपेक्ष त्रुटि क्या होती है? इसकी परिभाषा, मात्रक तथा सूत्र

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निरपेक्ष त्रुटि किसे कहते हैं निरपेक्ष त्रुटि निरपेक्ष त्रुटि क्या है? निरपेक्ष त्रुटि शब्द का प्रयोग किसी भी  मापक यंत्र द्वारा मापन में रह जाने वाली कमी   के लिए किया जाता है, जिस कमी को अधिकतर वह मापक यंत्र ना माप सकता हो इस कमी को ही निरपेक्ष त्रुटि के नाम से जाना जाता है। निरपेक्ष त्रुटि की परिभाषा " किसी मापक यंत्र द्वारा  किसी भौतिक राशि के प्रेषित मान तथा  उस भौतिक राशि के शुद्ध मान में  जो अंतर होता है,  उसको मापक यंत्र की  निरपेक्ष त्रुटि कहते हैं।" निरपेक्ष त्रुटि को  ' परम त्रुटि'   भी कहा जाता है । निरपेक्ष त्रुटि का मान  धनात्मक अथवा ऋणात्मक हो सकता है,  किन्तु शून्य कभी नहीं हो सकता है । निरपेक्ष त्रुटि का सूत्र यदि किसी भौतिक राशि का यथार्थ मान xₐ  हो तथा मापक यंत्र द्वारा प्रेक्षित मान x हो तथा इस प्रेक्षित मान में निरपेक्ष त्रुटि Δx  हो, तब निरपेक्ष त्रुटि           Δx = x - xₐ निरपेक्ष त्रुटि का मात्रक निरपेक्ष त्रुटि...

मोल की परिभाषा, संकेत, मान एवम् मानक परिभाषा की सम्पूर्ण जानकारी

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मोल की परिभाषा मोल यह  एक  मूल  मात्रक  है, यह  पदार्थ  की  मात्रा  का   मात्रक  होता  है। मोल  की मानक  परिभाषा किसी पदार्थ  की  वह  मात्रा, जिसमें उस पदार्थ  के अवयवों की संख्या, ( C-12 )  कार्बन-12  के  12 ग्राम  में परमाणुओं की संख्या के बराबर होती है, एक  मोल  कहलाती  है । अथवा किसी पदार्थ की उस मात्रा को  एक  मोल  कहा  जा  सकता  है , जिस मात्रा में उस पदार्थ के   परमाणुओं की  संख्या,  कार्बन -12  के  12 ग्राम  में  परमाणुओं की संख्या के बराबर हो। कार्बन-12   के  12  ग्राम   में  परमाणुओं  की  संख्या  6.022045 ×10²³   होती  है ।  इस  संख्या  को  संक्षेप  में  6.023 × 10²³   पढ़ा  जाता है। इस संख्या को ' आवोगाद्रो  संख्या'  कहा  जाता  है । आवोगाद्रो  स...

घन कोण क्या है, इसकी परिभाषा तथा सूत्र एवम् संकेत

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घन कोण  (SOLID ANGLE) यह एक व्युत्पन्न राशि है। घन कोण की परिभाषा- " किसी पृष्ठ द्वारा किसी बिंदु पर निर्मित कोण को घन कोण कहते हैं।" अथवा "किसी गोलीय पृष्ठ के क्षेत्रफल द्वारा गोले के केंद्र पर अंतरित कोण को घन कोण कहते हैं।" घन कोण का प्रतीक/संकेत -  इसे संकेत ω (ओमेगा)  द्वारा प्रदर्शित करते हैं। घन कोण का मात्रक  घन कोण एक विमाविहीन व्युत्पन्न राशि है परंतु इसका मात्रक होता है, इसके मात्रक को  स्टेरेडियन  (Sr) कहते हैं।     घन कोण का सूत्र- माना "  r "   त्रिज्या का एक गोला है जिसका केंद्र बिंदु  O  है,  r   त्रिज्या   के गोले के पृष्ठ क्षेत्रफल   ΔA  द्वारा गोले के केंद्र O पर बनाया गया घन कोण ω   =  क्षेत्रफल ΔA / r² किसी बिंदु पर बन सकने वाला अधिकतम घन कोण कितना होता है? इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए घन कोण के सूत्र का प्रयोग करना होगा; ω = क्षेत्रफल ΔA / r² चूंकि किसी बंद गोले के पूरे पृष्ठ का क्षेत्रफल 4πr²  होता है अत...

किलोग्राम की परिभाषा और मानक परिभाषा

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किलोग्राम (किग्रा)(kilogram)(Kg) यह " द्रव्यमान का मात्रक" होता है। सन 1887 में इसको परिभाषित किया गया था। इसकी परिभाषा जो कि प्लेटिनम इरीडियम के उस ठोस बेलनाकार टुकड़े से पड़ी है जो माप तौल की अंतर्राष्ट्रीय समिति के पास फ्रांस में सीवर्स (Sèvres) नामक स्थान पर रखा है। उस समय इस टुकड़े को ही द्रव्यमान की अंतरराष्ट्रीय इकाई माना गया था। वर्तमान में द्रव्यमान की जो परिभाषा प्रचलित है उस परिभाषा के अनुसार,  परमाण्विक स्केल पर कार्बन-12 Carbon-12 के  5.1088×10²⁵  परमाणुओं का द्रव्यमान,  1 किलोग्राम   होता है।  यह द्रव्यमान का परमाण्वीय मात्रक कहलाता है, इसके अतिरिक्त, 4 डिग्री सेल्सियस पर 1000.028 घन सेंटीमीटर पानी का द्रव्यमान भी एक किलोग्राम होता है Kilogram किलोग्राम

सार्थक अंक क्या होते हैं, कैसे निकालते हैं, परिभाषा, नियम और उदाहरण (Significant Figures)

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सार्थक अंक  (significant figure) सार्थक अंक क्या होते हैं ? साधारणतः मापन के परिणामों को एक संख्या के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिसमें वे सभी अंक सम्मिलित होते हैं जो विश्वसनीय (निश्चित) है तथा वह प्रथम अंक भी सम्मिलित होता है जो अनिश्चित है। किसी माप के मान में  वे सभी अंक जो  निश्चित हैं तथा  इनके साथ का प्रथम अनिश्चित अंक, सार्थक अंक कहलाते हैं। सार्थक अंकों की धारणा बहुत महत्वपूर्ण है। सार्थक अंक मापन की परिशुद्धता इंगित करते हैं। इनसे यह संकेत मिलता है कि कोई माप किस सीमा तक विश्वसनीय है। सार्थक अंक किसे कहते हैं ? किसी माप के उन अंको, जिन तक हम प्रमाणिक एवं यथार्थ  जानकारी कर सकते हैं, को सार्थक अंक कहते हैं। The digits that reflect the  precision of the measurement  are called  significant figure. सार्थक अंक कैसे पहचाने जाते हैं ? यदि मापन के बाद किसी वस्तु की लंबाई 479.5 व्यक्त की जाती है, तो इसमें अंक 4,7,9 तो निश्चित एवं विश्वसनीय हैं जबकि दशमलव बिंदु के बाद का अंक 5 अनिश्चित है, इस प्रकार मांपे...

आवर्त गति किसे कहते हैं, आवर्त गति की उदाहरण सहित व्याख्या

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आवर्त गति आवर्त गति की परिभाषा जब कोई पिण्ड   एक निश्चित समय अंतराल के बाद  एक निश्चित पथ पर  अपनी गति को  बार-बार दोहराता है,  तो पिंड की इस गति को  आवर्त गति कहते हैं । आवर्तकाल की परिभाषा  इस निश्चित समय अंतराल को  जिसके बाद गति की पुनरावृति होती है,  आवर्तकाल कहते हैं। सरल आवर्त गति करते हुए कण द्वारा  1 कम्पन में लगा समय  सरल आवर्त गति का  आवर्तकाल कहलाता है।  आवर्त गति के उदाहरण सूर्य की परिक्रमा करती पृथ्वी की गति आवर्त गति है जिसका आवर्तकाल 365 दिन अथवा 1 वर्ष है। पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए चंद्रमा की गति भी आवर्त गति है, जिसका आवर्तकाल 27.3 दिन है। घड़ी की सुइयों की गति भी आवर्त गति है, जिनमें घंटे वाली सुई का आवर्तकाल 12 घंटे, मिनट वाली सुई का आवर्तकाल एक घंटा (60 मिनट) और सेकंड की सुई का आवर्तकाल एक मिनट (60 सेकेंड) होता है। सभी ग्रहों और उपग्रहों की गति भी आवर्त गति है। एकसमान वृत्तीय गति भी आवर्त गति है।

न्यूटन का कणिका सिद्धान्त (Newton's Corpuscular Theory)

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न्यूटन का कणिका सिद्धांत प्रकाश की प्रकृति के संबंध में न्यूटन ने कणिका सिद्धांत का प्रतिपादन निम्नलिखित प्रकार से किया- (1.) प्रत्येक प्रकाश स्रोत में असंख्य, अदृश्य, सूक्ष्म एवं हल्के कण निकलते रहते हैं जिन्हें कणिकाएं कहते हैं। (2.) यह कणिकाएं किसी समांग माध्यम में प्रकाश के वेग से सभी दिशाओं में सरल रेखाओं में चलती हैं। (3.) जब यह कणिकाएं वस्तुओं से परावर्तित कर हमारी आंख की रेटिना पर गिरती है तो हमें वस्तुएं दिखाई देती है। (4.) भिन्न भिन्न रंगों की प्रकाश की कणिकाएं  भिन्न भिन्न  आकारों की होती हैं अर्थात प्रकाश का रंग कणिकाओं के आकार पर निर्भर करता है। कणिका सिद्धांत के आधार पर न्यूटन ने  प्रकाश का निर्वात में से होकर गुजरना,  प्रकाश का सीधी रेखाओं में चलना (छाया का बनना), प्रकाश का ऊर्जा स्वरूप होना  आदि तथ्यों को सफलतापूर्वक व्याख्या की है।

वैद्युत विभव की परिभाषा, SI मात्रक, विमा तथा सूत्र

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वैद्युत विभव / विद्युत विभव की परिभाषा, SI मात्रक, विमा तथा सूत्र विद्युत विभव की परिभाषा विद्युत क्षेत्र में किसी परीक्षण धन आवेश  को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में किए गए कार्य तथा परीक्षण आवेश के अनुपात को उस बिंदु पर  विद्युत विभव कहते हैं। विद्युत विभव का संकेत इसे ' V' से प्रदर्शित  करते हैं  तथा यह अदिश राशि है विद्युत विभव का सूत्र  माना किसी परीक्षण धन आवेश  q 0 को अनंत से वैद्युत क्षेत्र के किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य  W है तो, उस बिंदु पर विद्युत विभव [ V =  W / q 0    जूल / कूलॉम ] विद्युत विभव का मात्रक  विद्युत विभव का मात्रक जूल प्रति कूलाम होता है, जिसे ' वोल्ट'  कहा जाता है। विद्युत विभव की विमा  विद्युत विभव की विमा V=W/ q 0    V= F×d/i×t V =m×a×d/i×t अतः विद्युत विभव की विमा     [ML²T-A-¹] यहां यह बात ध्यान रखना बहुत आवश्यक है कि यदि धन परीक्षण आवेश को अनंत से वैद्युत क्षेत्र के भीतर किसी बिंदु तक लाने में कार्य वैद्...